Chhatrapati Shivaji Maharaj Biography | छत्रपती शिवाजी महाराज की जीवनी |

छत्रपती शिवाजी महाराज की जीवनी.



1630 देश में हिंदुत्व का विघटन हो चुका था एक ऐसा समय आ गया था जब हिंदुओं को हिंदू नाम रखने की अनुमति नहीं थी ऐसे में हिंदू साम्राज्य की स्थापना करने वाले एक महान सम्राट का जन्म हुआ, नाम था छत्रपति शिवाजी महाराज हिंदू हृदय सम्राट छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को पुणे के पास स्थित जुन्नर नगर के शिवनेरी दुर्ग में हुआ था छत्रपति शिवाजी महाराज का पूरा नाम शिवाजी राजे भोसले था. 

शिवाजी महाराज के पिता का नाम शाहजी भोंसले और माता का नाम जीजाबाई था शिवाजी महाराज के पिता शाहजी भोंसले  दक्षिण सल्तनत में बीजापुर सुल्तान के मराठा सेनाध्यक्ष थे छत्रपति शिवाजी महाराज को अपनी प्राथमिक शिक्षा उनकी माता जीजाबाई से प्राप्त हुई माता जीजाबाई शिवाजी महाराज को रामायण और महाभारत का अध्ययन कराया करती थी शिवाजी महाराज ने बचपन में ही राजनीत  व युद्ध की शिक्षा हासिल की छत्रपति शिवाजी महाराज को दादोजी कोंडदेव ने घुड़सवारी तीरंदाजी और निशानेबाजी की शिक्षा दी छत्रपति शिवाजी महाराज पर महाराष्ट्र के लोकप्रिय संत, 

संत रामदास एवं संत तुकाराम का बहुत प्रभाव था संत रामदास शिवाजी के आध्यात्मिक गुरु थे संत रामदास ने ही शिवाजी को देश प्रेम और देश उद्धार के लिए प्रेरित किया था शिवाजी महाराज का विवाह 14 मई 1640 को सईबाई निंबालकर के साथ लाल महल पुणे में हुआ था 1645 तक बीजापुर सल्तनत में आपसी संघर्ष शुरू हो गया था साथ ही साथ बीजापुर सल्तनत पर मुगलों का आक्रमण जारी था बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह ने बहुत से किलो से अपनी सेना हटा कर उन किलों को स्थानीय शासकों को सौंप दिया जब  आदिल शाह बीमार पड़ा तब बीजापुर सल्तनत में अराजकता फैल गई शिवाजी महाराज ने इस मौके का फायदा उठाया और बीजापुर में प्रवेश करने का निर्णय लिया. 

मात्र 15 वर्ष की आयु में शिवाजी महाराज  या अपना पहला आक्रमण तोरण किले पर किया और  17 वर्ष की आयु में ही लोगों को संगठित करके अपने आसपास के किलो पर हमले प्रारंभ कर दिए शिवाजी ने अपना असली विजय अभियान 1656 में आरंभ किया जब उन्होंने मराठा सरदार चंद्र राव मोरे से जावली छीन लिया इस प्रकार एक एक करके उन्होंने अनेक किले जीत लिए जिनमें  सिंह गढ़ कोकण राजगढ़ औरंगाबाद और सूरत के किले प्रसिद्ध है शिवाजी ने साथ ही साथ पुरंदर और जावेली के किलो पर भी अधिकार कर लिया शिवाजी ने साथ ही साथ पुरंदर और जावेली के किलो पर भी अधिकार कर लिया शिवाजी महाराज सभी धर्मों का सम्मान करते थे 

किंतु वह जबरदस्ती धर्म परिवर्तन के प्रखर विरोधी थे शिवाजी के समकालीन कवि कवि भूषण कहते है  शिवाजी के समकालीन कवि कवि भूषण कहते हैं अगर शिवाजी नहीं होते तो काशी अपनी संस्कृति  खौ चुका होता मथुरा मस्जिदों में बदल गया होता एवं सबकुछ सूना हो गया होता शिवाजी की सेना में कई मुसलमान सैनिक भी थे सिद्दी इब्राहिम शिवाजी के तोपों के प्रमुख थे अपनी धर्मनिरपेक्षता के कारण ही जनता के हित को समझते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1657 तक मुगल साम्राज्य के साथ शांतिपूर्ण रिश्ते रखें शिवाजी महाराज ने ही औरंगजेब को बीजापुर हासिल करने के लिए मदद की जिसके बदले में बीजापुरी किले एवं गांव का ह  शिवाजी को दिया गया मुगलों से शिवाजी की तकरार मार्च 1657 में शुरू हुई जब मुगलों के 

अधिकारियों ने अहमदनगर पर छापा मार  छत्रपति शिवाजी महाराज की निरंतर बढ़ती ताकत से बीजापुर का सुल्तान अहमद शाह खौफ में था और वह किसी भी तरह छत्रपति शिवाजी महाराज को रोकना चाहता था 1659 में आदिल शाह ने अपने अनुभवी और पुराने सेनापति अफजल खान क शिवाजी को खत्म करने के इरादे से भेजा अफजल खान ने 120000 सैनिकों के साथ कूच किया तुलजापुर के मंदिरों को नष्ट करता हुआ अफजल खान सतारा के 30 किलोमीटर उत्तर शिरवल के नजदीक वाई नामक स्थान तक आ गया पर शिवाजी महाराज प्रतापगढ़ के दुर्ग पर ही रहे अफजल खान ने अपने दूत कृष्णजी भास्कर को संधि वार्ता के लिए भेजा उसने शिवाजी के सामने यह संदेश दिया कि अगर शिवाजी बीजापुर की अधीनता स्वीकार कर ले तो सुल्तान उन्हें सभी क्षेत्रों का अधिकार दे देंगे जो शिवाजी के नियंत्रण में है 

साथ ही साथ शिवाजी को बीजापुर के दरबार में एक सम्मानित पद प्राप्त होगा शिवाजी ने इस प्रस्ताव के विपरीत शांति दूत बनकर आए कृष्णजी भास्कर को उचित सम्मान देकर अपने ही दरबार में रख लिया इसके बाद छत्रपति शिवाजी महाराज और अफजल खान की सेना के बीच प्रतापगढ़ के किले पर 10 नवंबर 1659 को युद्ध हु  युद्ध में मिली हार के बाद अपने दुर्ग पर अफजल खान ने छत्रपति शिवाजी महाराज को  शांति वार्ता के लिए आमंत्रित किया शिवाजी को विश्वासघात का संदेह पहले से था इसलिए वह हथियार के साथ पूरी तैयारी से गए थे अफजल खान ने शिवाजी को गले लगाने के लिए पास बुलाया 

अफजल खान ने छत्रपति शिवाजी महाराज को दबोच कर मारने की कोशिश करी अफजल खान ने छत्रपति शिवाजी महाराज को दबोच कर मारने की कोशिश करी लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी कटार से उसका कलेजा चीर दिया लेकिन छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपनी कटार से उसका कलेजा चीर दिया अफजल खान के इस विश्वासघात के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने सैनिकों को बीजापुर पर आक्रमण का निर्देश दिया 28 दिसंबर 1659 को इसी बहादुरी के साथ उन्होंने बीजापुर के सेनापति  रुस्तमजमन के हमले का जवाब कोल्हापुर में दिया बीजापुर के सेनापति  

रुस्तमजमन के हमले का जवाब कोल्हापुर में दिया छत्रपति शिवाजी महाराज के पास मराठाओं की एक विशाल सेना तैयार थी उन्होंने गोरिल्ला युद्ध के प्रयोग का भी प्रचलन शुरू किया शिवाजी महाराज की सेना में नौसेना भी शामिल थी भारतीय नौसेना का जनक शिवाजी महाराज को ही माना जाता है शिवाजी महाराज की बढ़ती ताकत को देखते हुए मुगल सम्राट औरंगजेब ने जय सिंह और दिलीप खान को शिवाजी को रोकने के लिए भेजा शिवाजी के सामने समझौता पेश किया गया जिसके तहत शिवाजी को 24 किले मुगल साम्राज्य को सौंपने थे उस वक्त छत्रपति शिवाजी महाराज ने वह समझौता स्वीकार कर लिया इसी उद्देश्य से 1666 में औरंगजेब ने शिवाजी महाराज को उनके 9 वर्षीय पुत्र संभाजी के साथ आगरा में आमंत्रित किया 


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