भारत की रहस्य मई किताबे जिसके बारे में जान कर आपका दिमाग हिल जायेगा |
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हेल्लो दोस्तों स्वागत है आपका हमारे ब्लॉग में जहा आज हम बात करते है भारत में मैजूद रहस्य मई किताबो के बारे में आज कल जो हालत है बच्चो की या बड़ो की उसके हिशाब से लोग आज कल कोई भी किताब नहीं पढता है आज हम देखेंगे भारत की कुछ रहस्य मई किताब के बारे में यह सारी किताबो के बारे में जान कर आप को अपने भारतीय होने पर गर्व होंगा वैसे तो भारत में ऐसी हालत है की बोहोत ही सारे लोग धर्म ग्रन्थ और वेदों का मजाक उड़ाते है और अपने आप को आधुनिक कहेलाना पसंद करते है पर प्राचीन ग्रंथो में बोहोत ही सारी जानकारी और ज्ञान है जिसकी किसी को कद्र ही नहीं है |
हमें उन ऋषि मुनिओ का आभार मानना चाहिए जिसने हमें ऐसे रहस्य मई ज्ञान को हमारे लिए ग्रंथो में लिख कर छोड़ दिया है और वह हमें प्राचीन सभ्यता सोंप कर गए है जहा एक तरफ हमारे देश के युवा है जो हमारे ग्रंथो को कभी पढना नहीं चाहते या आपने धर्म ग्रन्थ को समज ना नहीं चाहते है और दूसरी और दुनिया भर के लोग हमारे देश के ग्रन्थ को और सारी धर्म किताबो को पढ़ कर और उसका ज्ञान लेकर बोहोत ही सारे लोग इसका प्रचार भी कर रहे है और हमारे ग्रंथो में से ही शिख कर विदेश के लोगो ने अपनी किताबे और बोहोत ही सारे दुसरे नए ग्रंथो को तैयार किया है |
आज हम हमारे भारत देश के पवित्र ग्रंथ के बारे मे जानेंगे |
१.विज्ञान भैरव तंत्र
वैसे तो तंत्र विद्या पर बोहोत ही सारी किताबे मिल जायेंगी लेकिन इस में से सबसे महत्त्व पूर्ण पुस्तक है विज्ञान भैरव तंत्र यह पुस्तक किसने लिखी है यह आज तक एक रहस्य बना हुआ है कहा जाता है की यह पुस्तक भगवान शिव और माता पार्वती के संवाद से अस्तित्व में आई थी इस पुस्तक में पार्वती के द्वारा प्रश्न पूछे जाते है और भगवान् शिव इसका उत्तर देते है इस पुस्तक में कई सारी विद्याओ का भी रहस्य है यह बुक के हर पन्ने पर कोई न कोई रहस्य है जिसे पढ़ कर आप हैरान हो जायेंगे | क्या इस से पहेले आप ने इस किताब के बारे में सुना था बोहोत ही सारे लोगो का जवाब न होंगा क्युकी हम यह सब नहीं पढ़ते है |
२.अष्टाध्यायीसूत्रवृति:
यह किताब का निर्माण पाणनिय द्वारा किया गया है इस किताब में दुनिया भर की प्रथम भाषा का यह प्रथम ग्रन्थ है यह किताब पासचो इसा पूर्व की किताब है इस ग्रन्थ का नाम अष्टाध्याय इस लिए पद गया है क्युकी इस किताब में आठ अध्याय है कहा जाता है की इस योग सूत्र को समज ने के बाद आप को जिस ज्ञान की प्राप्ति होती है वह दुनिया में आप को कही भी नहीं मिलेगा इस किताब के ऊपर से ही अष्टांग योग की रचना की गई है इस किताब में दुनिया भर के ग्रंथो की सारे दर्शनों का ज्ञान है जिस से मोक्ष की प्राप्ति होती है |
३.सामुद्रिक शास्त्र
यह शास्त्र भी एक रहस्य मई शास्त्र है जो व्यक्ति के सपूर्ण व्यक्तित्व और भविष्य को बताने वाला शास्त्र है यह विज्ञान तो सामुद्रिक शास्त्र में से कुछ शाखा ये है यह शास्त्र आपके मुख मंडल और यह आपके पुरे शारीर के बारे में परिचित है इस शास्ते में सारे ब्रह्मांड का ज्ञान है और इस शास्त्र के बोहोत ही सारे जानकार दक्षिण भारत में पाया जाता है इस शास्त्र का निर्माण पांच हजार साल पहेले हुआ था इसका प्रसार और प्रचार सबसे पहेले ऋषि समुद्र ने किया था इस लिए इसका नाम इस ऋषि के नाम से रखा गया है इस किताब की विद्या आब यूरोप में भी फ़ैल गयी है ईशा पूर्व ४२३ में इसके सुवर्ण अक्षरों से लिखी किताब मिली थी जिसका नाम था सामुद्रिक शास्त्र इस किताब को चिकंदर महान को भेट किया गया था |
४.उपनिषद्
उपनिषद् का नाम आपने तो सुनाइ होंगा इसकी कुल शंख्या १०८ है उपनिषद् सर्वोच्च मान्यता प्राप्त विभिन्न दर्शनों का संग्रह है और इसे वेदांत भी कहा जाता है उपनिषद् भारत के अनेको ऋषि मुनिओ ने मिल कर वर्षो के चिंतन के बाद रखा हुवा नाम है उपनिषद् को आधार मान कर उसके दर्शनों को सभी भाषओमे रूपांतरित किया गया है अनेक धर्मो और विचारधाराओ का जन्म हुवा जगत गुरु आदि शंकरचार्य ने जिन दस उपनिषदों में अपना भाष्य लिखा उन्हें प्रमाणिक माना गया है उपनिषद् वेदों का सार है उपनिषद् में कई अलैकिक,रोचक और रहस्य मई बाते कही गई है जिसे पढ़ कर आपके सोचने का नजरिया बदल जायेगा |
५. बेताल पच्चीसी
यह कथा भारत में लोक कथा में से सबसे प्रिय लोक कथा है यह विरत विक्रम दित्य का न्याय शक्ति का बोध कराती है इसमें विक्रामादित्य को बेताल प्रति दिन एक कहानी सुनाता था वह सम्राट को प्रश्न पूछता था और अगर सम्राट ने इसका सही उत्तर दे दिया या कुछ भी बोला तो बेताल उसके साथ नहीं जायेंगा वह फिर से पेड़ पर जा कर बैठ जायेगा और अगर उसने प्रश्न का उत्तर नहीं दिया तो वुसका सर फट जायेगा इसे भारत की पहेली भूतो की कहानी है | जब बेताल पच्चीस मी कहानी सुना रहा होता है तब गुणानंद रचित बर्कः नामके ग्रन्थ में इसा पूर्व ४५५ में वर्ष में हुई थी कहा जाता है की इसको काफी पुराणी और ऐतिहासिक भाषा में लिखा गया है इसमें सात लाख छंद थे जिसका आज कही भी उल्लेख नहीं है |
६.रसरत्नाकर
प्राचीन भारत के महान रसायनिक शास्त्री नागार्जुन उनका नाम तो आप सभी ने सुना ही होंगा उसके जन्म स्थान और समय पर कोई भी सटीक जानकारी नहीं है जिस पर सबके अलग अलग मत है इनकी यह पुस्तक बहुत ही प्रसिध्ध है कितनी सारे ज्ञान की बाते लिखी हुइ है और रसरत्नाकर में रस यानि की परे को कैसे बनाते है इसकी सारी जन करी दी गइ है इसमें धातु को कैसे बनाते है इसकी पूरी विधि बताई गयी है और भी बोहोत ही सारी धातु को बनाने की विधि बताई गयी है कई सारी धातु का रहस्य भी इसमें है इस किताब में सोना,चांदी,ताम्बा और पित्तल जैसी कई धातु को कैसे सुध्ध करे इसकी सबसे पहेले जो जानकारी थी वह यह किताब में से ही निकली है |
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