top 7 Unsolved Mystery in hindi | दुनिया के 7 अनसुलझे रहस्य

दुनिया के 7 अनसुलझे रहस्य 



दोस्तों, पिछली दो शताब्दी में प्रतिभा इतनी बड़ी बड़ी खोज हुई है, उसने संपूर्ण मानव जाति को बदलकर रख दिया है। इसके साथ ही ये ये नवीन खोजने मानव जाति के लिए कई अनसुलझे सवालों का भी जन्म दिया है। तो आइए दोस्तों आज के इस वीडियो में हम जानते हैं दुनिया के साथ अनसुलझे सवालों के बारे में। पहला सवाल आता है के प्रति पल जीवन की शुरुआत कैसे हुई? माना जाता है कि करीब चार अरब वर्ष पूर्व किसी अज्ञात कारण की वजह से
 
समुद्र में किसी मॉल आदि मंदिरों में एक हलचल उत्पन्न हुई और बायोकेमिकल के आपस में मिलने से कई जीव और जीवन की उत्पत्ति शुरू हो गई। कुछ साधारण रसायन है, एक दूसरे से मिले और जीवन का आधार बनाना। मॉलिक्यूल्स प्रकृति बनाने में सफल रहे। हमारा और समस्त जीवन इन्हीं मॉलिक्यूल्स के विकास से उत्पन्न हुआ है। लेकिन यह तरल मॉलिक्यूल्स किस प्रकार किस प्रक्रिया से इस तरह जमा हुए कि उन्होंने जीवन को जन्म दिया। डीएन।
 
कैसे बनाना पहली कोशिका कैसी थी? स्टैनले मिलर के प्रयोग के 50 वर्ष बाद भी वैज्ञानिक एकमत नहीं है कि जीवन का प्रारंभ कैसे हुआ। कुछ कहते हैं कि धूमकेतु से आया कुछ के अनुसार यह ज्वालामुखी के पास के जलाशयों से प्रारंभ हुआ। कुछ कहते हैं कि जीवन का प्रारंभ समुद्र में उल्कापिंड़ों के गिरने से हुआ। जबकि कुछ कहते हैं कि हम दो एलियन के वंशज हैं लेकिन असल में प्रगति पर है। जीवन की शुरुआत कैसे हुई ये आज भी एक अनसुलझे सवालों में से एक है। अब आता है दूसरा सवाल
 
क्या हम इस ब्रह्मांड में अकेले हैं? तो शायद नहीं हमारे भी दे। मंगल ग्रह से लेकर बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा से ही कई प्रकाश वर्ष दूर स्थित है। तारों को खंगालना चाहते हैं जहाँ जीवन की मूलभूत इकाई द्रव्य जल की उपस्थिति संभव है। कई रेडियो दूरबीन ब्रह्मांड के हर भाग से आते हुए रेडियो सिग्नल को खंगालने में लगे हैं। लेकिन 1977 के बावजूद सिग्नल के अतिरिक्त कोई भी सफलता हाथ नहीं मिली है। खगोल वैज्ञानिक हमारे सौर मंडल से कई प्रकाश वर्ष दूर ग्रहों के वातावरण में जल
 
और ऑक्सीजन की जांच करने में सफल हो गए हैं। हमारी मिल्की वे मंदाकिनी आकाशगंगा में जीवन योग्य सात अरब से भी ज्यादा कर रहे हैं जिन पर परग्रही ग्रहों की तलाश में अगले कुछ दशक में काफी रोमांचक जानकारी प्राप्त होने वाली है।
 
अब आता है। तीसरा सवाल की क्या समय यात्रा संभव है? आइंस्टीन के सापेक्षवाद सिद्धांत के अनुसार अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र के यात्री समय यात्रा कर चूके हैं क्योंकि अंतरिक्ष में समय गति धीमी हो जाती है। वर्तमान में यह समय अकल पर है लेकिन यदि समय गति बढ़ा दी जाए तो इसी समय के प्रभाव से मानव 1 दिन में सहस्त्र वर्ष की यात्रा कर पाएगा। प्रकृति शायद भूतकाल में यात्रा करने की अनुमति नहीं देती है, लेकिन भौतिक विज्ञान के अनुसार वारहोल
 
और अंतरिक्ष यानों से ये संभव है। सैद्धांतिक रूप से समय यात्रा संभव है, लेकिन तकनीकी विकास में समय लग सकता है। अब चौथा सवाल आता है की कार्बन को कहाँ ठिकाने लगाये?
 
पिछले दो शताब्दियों में हाउ मच जैव ईंधन को जलाकर अपने वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड गैस भर रहे हैं। यह कार्बन की सतह के नीचे तेल और कोयले के रूप में दबा था। अब हमें इस कार्बन को पृथ्वी के वातावरण से हटाना होगा अन्यथा में बदलते हुए वातावरण के महाविनाश को झेलने के लिए तैयार रहना होगा। ये खतरा इतना बड़ा है के प्रति पर जीवन को भी नष्ट कर सकता है। हमें ऊर्जा के वैकल्पिक मार्ग ढूंढने होंगे जो हमें और हमारे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे। वरना आने वाले
 
50 से 100 सालों में प्रति का विनाश निश्चित है। पांचवा सवाल आता है की जनसंख्या विस्फोट का क्या हाल है? वर्तमान की जनसंख्या 1960 की जनसंख्या की दोगुनी है और ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि 2050 तक ये नौ अरब को पार कर जाएगी। इतनी बढ़ती जनसंख्या कहा रहेंगी तथा निरंतर बढ़ती जनसंख्या के लिए भोजन और ईंधन है। कहाँ से आएगा? शायद हम कुछ को मंगल पर भेज दें या कुछ भाग के लिए भूमिगत शहरों का निर्माण कर पाए। भोजन के लिए प्रयोगशाला में माँ से निर्माण हो सकता है। फिलहाल तो अब यह एक
 
विज्ञान फैंटसी लगता है, छर्रा सवाल आता है सागर के दल हमें क्या हैं? आपको बता दें कि समुद्र का 95% भाग अभी भी अज्ञात है। समुद्र की गहराई में क्या है, ये शायद अभी भी रहस्य है जो किसी को नहीं पता। 1960 में से प्रश्न का उत्तर पाने डॉन बॉल्स और जैक समुद्र की सतह से सात मील तक नीचे गए थे। यह प्रयास मानव प्रयत्नो की प्रकाष्ठा थी, लेकिन वे समुद्र की तलहटी में जीवन की सिर्फ एक ही झलक देख सकते थे। सागर की तलहटी में पहुंचना इतना कठिन है कि हम वहाँ मानव रहित वाहन ही भेजते हैं।
 
सागर तलहटी में की गई आश्चर्यजनक खोज जैसे बैरल में मछली जिसका सिर्फ पारदर्शी होता है, बहे अल्जाइमर बिमारी की चिकित्सा में प्रयुक्त हो सकती है। समुद्र में की गई इस तरह की नई खोजें इस मायावी दुनिया का अंश मात्र है। अभी तो इस आधार समुद्र के कई रहस्यों से पर्दा उठना बाकी है। सातवाँ और सबसे बड़ा सवाल आता है कि ब्रह्मांड कितना बड़ा है? लेकिन दोस्तों आपको बता दें कि ब्रह्मांड असीम और अनंत है। इसके आकार का अनुमान नहीं लगाया जा सकता। अगर मान ले की हमें ब्रह्मांड की सीमा का
 
चंदा से लगा लिया है। फिर भी आपके अंदाज़ में जहाँ ब्रह्माण्ड का अंत होता है उससे आगे भी कुछ ना कुछ तो जरूर होगा। उसी प्रकार हम सोचते चले कि ब्रह्मांड इतना बड़ा है तो ये और भी फैलता जाएगा। दोस्तों वैज्ञानिक के अनुसार, 13.8 साल पहले बिग बैंग की घटना हुई थी और एक बिंदु से सारे मैटर का डिमांड हुआ। तारे, गृह, आकाशगंगा ये सभी के कारण ही संभव हो पाया। बिग बैंग के बाद से ही हमारा ब्रह्मांड लगातार फैल रहा है और सारी आकाशगंगाएँ दूर जा रहे हैं।
 
इससे वैग्यानिकों ने ये तर्क लगाया है कि ये सभी मैटर एक कारण के रूप में थे और के बाद ब्रह्मांड का विस्तार हुआ। और दोस्तों सबसे बड़ा सवाल हमारे दिमाग में ये आता है की क्या और भी ब्रह्माण्ड है और अगर दूसरे ब्रह्मांड है और कितने ब्रह्मांड है क्योंकि ब्रह्मांड के भी महा ब्रह्मांड है तो दोस्तों हमें अभी तक इन सब?


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