महाभारत के 7 ज़िन्दा सबूत जिन्हे देख वैज्ञानिक भी हैरान है.
दोस्तों, महाभारत भारत का ही नहीं बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा महाकाव्य है। महाभारत का युद्ध क्यों और कैसे हुआ था, यह बात तो हम सभी जानते हैं, लेकिन फिर भी कुछ बुद्धिजीवी इस बात से सहमत नहीं है कि महाभारत का युद्ध सच में हुआ था। उन्हें लगता है कि यह सिर्फ काल्पनिक घटनाओं पर आधारित तथ्य है। लेकिन महाभारत से जुड़े कुछ रहस्य और कुछ घटनाएं ऐसी हैं जिनके सबूत आज भी देखने को मिलता है। महाभारत का हर पात्र जीवंत है, चाहे वह पांडव हो, कर्ण हो, कृष्ण हो या कौरव हो। भारत में ही नहीं बल्कि भारत के बाहर भी कई ऐसे स्थान मौजूद है।
जहाँ पर महाभारत की घटनाओं को सच साबित करने के सबूत मौजूद हैं। इतना ही नहीं ये भी साबित हुआ है कि महाभारत दुनिया का पहला परमाणु शक्ति वाला ही होता था। बहुत सारे अस्त्र शस्त्र भी भारत के स्थानों से पुरातत्व विभाग ने खोजे हैं, जिनकी जांच करने के बाद उन्हें महाभारत काल का ही बताया गया है। और श्रीमद्भगवद्गीता तो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि ये महाभारत काल में ही श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को ज्ञान के रूप में दिखाई थे। भगवद गीता में भी घटनाएं बताई गई है, जो आज के समय में घटित हो रही है। चाहे हम इस बात को समझ पाए या ना पाए लेकिन वर्तमान समय में जो भी घटित हो रहा है
श्रीकृष्ण ने महाभारत के समय ही ये बातें उल्लेखित करते थे महाभारत समय के महल के अवशेष मिलना, गुफाओं का मिलना, साथ ही समुद्र में डूब चुकी उस समय के शहरों का खोजा जाना। यह सब इस बात की ओर इशारा करते हैं कि महाभारत कोई काल्पनिक घटना नहीं थे, बल्कि एक सत्य घटना थे जिसने पूरे योग को ही बदल डाला। आज हम आपको बताने वाले हैं महाभारत से जुड़े कुछ ऐसे तथ्य और घटनाएं जिनके सबूत आज भी मौजूद हैं। कुछ ऐसे ऐतिहासिक स्थल जहाँ पर महाभारत युद्ध होने के साक्ष्य मिले हम दोस्तों अगर आपको महाभारत पर यकीन है
महाभारत युद्ध स्थल कुरुक्षेत्र महाभारत के युद्ध कुरुक्षेत्र में हुआ था। कुरुक्षेत्र आज भी हरियाणा में स्थित है। कुरुक्षेत्र में जाकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा महाभारत काल के कई अवशेष खोजे गए हैं, जहाँ पर बाण और भाले भी मिले हैं। कुरुक्षेत्र की भूमि में कई महान योद्धा वीरगति को प्राप्त हुए थे। यही वो स्थान है जब भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन का अपनों के प्रति मोह भंग कर गीता का ज्ञान दिया था। महाभारत में कुरुक्षेत्र के लाल माटी का वर्णन किया गया है, जो आज भी कुरुक्षेत्र में देखे जा सकते हैं और और भी ऐसे बहुत सारे सबूत कुरुक्षेत्र से मिले हैं।
जिनसे महाभारत के साथ होने की पुष्टि होते। पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा कुरुक्षेत्र में महाभारत युद्ध के समय के हथियार और ऐसे बहुत सारे सबूत मिले हैं जो कि महाभारत के युद्ध को सत्य साबित करते हैं और कुरुक्षेत्र का होना खुद इस बात का सबूत है कि महाभारत युद्ध कोई काल्पनिक घटना नहीं है बल्कि घटना है।
कुछ रंग जब मामा शकुनी ने दुर्योधन के साथ मिलकर पांडवों के रुकने वाले महल को निशाना बनाया और उस महल में आग लगा दी थी, जिससे कि पांडव रातोंरात उस आग में जलकर भस्म हो जाए। लेकिन पांडवों के जासूसों ने उन्हें पहले ही खबर करते थे और पांडव उस महल से निकलने वाले गुप्त सुरंग से निकलकर बच गए थे। ये सुरंग आज भी गाजियाबाद में हिंडन नदी के किनारे खोलते हैं, जिसे पांडव लाक्षागृह कहा गया था, जोकि लाख की बने हुए थे। इस लाक्षागृह महल के अवशेष आज भी बरनावा में पाए जाते हैं। बरनावा या वारणावत नामक स्थान मेरठ
जैसे 35 किलोमीटर दूर स्थित है जो की आज एक तहसील है। यहाँ पर महाभारतकालीन लाक्षागृह चिन्हित किया गया है। अब जो की एक टीले के रूप में आज भी मौजूद हैं। यहाँ से भटकते हुए पांडव आज मौजूद नागालैंड में पहुँच गए थे जहाँ पर राक्षसी हिडंबा संग भीम का विवाह हुआ और घटोत्कच नामक पुत्र उत्पन्न हुआ। भीम अपने पुत्र के साथ गोटी से शतरंज खेलते थे जो की आज भी नागालैंड के दीमापुर में देखे जा सकते हैं। इस गुप्त सुरंग और लाक्षागृह के अवशेषों का होना है। इस बात की तरफ संकेत करता है कि महाभारत के युद्ध काल्पनिक नहीं था।
श्याम जी, आपको ये बात जानकर हैरानी होगी कि भीम के पुत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक से भगवान श्री कृष्ण ने ब्राह्मण के वेश में दान में उनका शीश मांगा था के पश्चात श्रीकृष्ण ने बर्बरीक को कलियुग में स्वयं के नाम से पूजित होने का वर दिया था। यानी कि भविष्य में उनके नाम की पूजा की जाएगी। भर भर एक ने श्रीकृष्ण से कहा कि वह युद्ध को देखना चाहता है, इसलिए श्रीकृष्ण ने बर्बरीक के शीश को दूर स्थान पर रखवा दिया था और वही बर्बर एक आज खाटूश्यामजी के नाम से पूछे जाते हैं। जैसा कि श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया था, जिसे स्थान पर बर्बरीक का शीश रखा गया था, वह स्थान
मथुरा मथुरा नगरी के बारे में हम सभी जानते हैं। श्रीकृष्ण भगवान की जन्म स्थली मथुरा नगरी आज भी हमारे बीच मौजूद हैं। इतना ही नहीं उनके जन्म स्थली होने की वजह से महाभारत में भी ये घटनाओं का प्रमुख केंद्र रहा है। ज स्थान पर रहता था। आज भी उस स्थान को कंस के किले के नाम से जाना जाता है। कृष्ण को मारने के लिए कई रचनाएँ रहते थे। ये केला आज भी मथुरा में देखा जा सकता है। मथुरा नगरी को नष्ट करने के लिए कंस द्वारा कई राक्षसों द्वारा हमला भी करवाया गया था लेकिन मथुरा का बाल भी बांका नहीं किया जा सका।
क्योंकि ये नगरी श्री कृष्ण के नगरे थे और आज भी ये वैसे ही है जैसे पहले के जमाने में हुआ करते थे। मथुरा नगरी को कृष्ण भगवान की जन्म स्थली होने की वजह से ही पवित्र स्थान माना जाता है।
दिल्ली और मेरठ महाभारत के समय दिल्ली को इंद्रप्रस्थ और मेरठ को हस्तिनापुर कहा जाता था। दिल्ली में खुदाई में कई ऐसे अवशेष मिले हैं जिनके आधार पर पुरातत्त्वविदों ने ऐसा मानना है कि पांडवों की राजधानी रहे होंगे। दिल्ली में पुराना किला जो कि यमुना नदी के किनारे पर बना हुआ है, इसे पांडवों ने ही बनवाया था। यह बहुत सारी ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी है। अब दिल्ली का एक जमाने में बनवाया गया था। जांच करने पर यह साबित हो गया। महाभारत बहुत साल पहले की घटना है इसलिए महाभारत घटित होने के बाद ऐसे बहुत सारे दूसरे राजाओं का राज़ यहाँ पर होता रहा।
किसी प्रकार से पांडवों के महल का भी बदलाव होता रहा। लेकिन दिल्ली में पुरातत्व विभाग ने ऐसे कई खुदाई कार्यक्रम चलाए और जांचों में पता लगाया कि दिल्ली का महल पांडवों के समय का बनवाया गया था, जिसका उल्लेख महाभारत में किया गया है।
ब्रह्मास्त्र महाभारत काल में ब्रह्मास्त्र अस्त्र का उपयोग किया गया था। कहा जाता है कि ब्रह्मास्त्र सबसे बड़ा अस्त्र होता था, जिसका कार्ड सिर्फ ब्रह्मास्त्र से किया जा सकता था और ब्रह्मास्त्र को हासिल करने के लिए बहुत ज्यादा तपस्या और साधना करने पड़ते थे। ब्रह्मास्त्र ऐसा ताकतवर अस्त्र था जो कि भयंकर तबाही मचाने वाला होता था। ये अस्त्र धर्म और सत्य को बनाए रखने के लिए ब्रह्मा भगवान द्वारा बनाया गया था, जो की एक विनाशकारी परमाणु हथियार था। इसका उपयोग महाभारत में ही नहीं बल्कि रामायण में भी किया गया था। ये क्या ऐसा
तथा जो कि शहर के शहर तबाह कर देता था। वर्तमान समय में हथियार बनाने के लिए जिन आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है, वह महाभारत से ही ले गए हैं। कई प्रकार के परमाणु बम जो बनाए गए हैं वो सब महाभारत की ही देर में।
चक्रव्यूह कहते हैं कि महाभारत में कई तरह के चक्रव्यूह रचे गए थे। एक चक्रव्यूह पांडवों ने भी सीखा था जब वह अपने अज्ञातवास पर गए थे। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में 16 सिंह की धार के नीचे बसा एक गांव मौजूद हैं, जिससे राजनांदगांव के नाम से जाना जाता है। यह मान्यता है कि पांडव अपने अज्ञातवास के दौरान यहीं रुके थे और इन्हें चक्रव्यूह का ज्ञान प्राप्त हुआ था, जिसे उन्होंने एक पत्थर.

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